नयी दिल्ली। बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से लगातार घमासान मचा हुआ है। कार्तिकेय सिंह और लेशी सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अलावा एक जदयू विधायक ने भी नीतीश सरकार पर सवाल खड़े कर दिए। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद का बयान भी सामने आया है। जिसमें उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार के फॉर्मूले पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मानना है कि कांग्रेस को उचित हिस्सेदारी नहीं मिली है।

आजाद ने कहा कि गैर भाजपा दलों का मिलकर सरकार बनाना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन कांग्रेस को उचित हिस्सेदारी नहीं मिली है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महागठबंधन में कांग्रेस को छोड़कर अन्य घटक दलों को अच्छी संख्या में मंत्री पद मिले हैं। आजाद का मानना है कि कांग्रेस को कम से कम 4 मंत्री पद मिलने चाहिए थे।

हिंदी समाचार एजेंसी ‘भाषा’ के साथ बातचीत में आजाद ने कहा कि आप देखिए कि राजद के पास 79 विधायक हैं और उसे 17 मंत्री पद मिले हैं और जनता दल (यूनाइटेड) कोटे के 46 विधायक (एक निर्दलीय समेत) हैं और उसे 13 मंत्री पद मिले हैं। हिंदुस्तान अवामी मोर्चा के चार विधायक हैं और उसे एक मंत्री पद मिला है। कांग्रेस के 19 विधायक हैं और उसे सिर्फ दो मंत्री पद मिले हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि विभागों का बंटवारा भी बिना किसी तर्क के किया गया है और यह हैरान करने वाली बात है कि कांग्रेस से किसी ने भी मंत्री पदों को लेकर समुचित हिस्सेदारी के लिए दबाव नहीं बनाया।

गौरतलब है कि मंत्रिमंडल विस्तार के एक दिन बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुलाकात की। कहा जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव ने ही नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल करने की पूरी योजना तैयार की थी और इसकी शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के पटना स्थित आवास पर इफ्तार पार्टी के दौरान हो गई थी।

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