गुजरात दंगों पर एसआईटी टीम की ओर से किए गए दावों पर कांग्रेस का भी जवाब आया है। पार्टी ने दिवंगत नेता अहमद पटे पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी पलटवार किया है। कांग्रेस ने कहा कि जांच एजेंसी की तरफ से अहमद पटेल के खिलाफ आरोप लगाना प्रधानमंत्री की ही व्यवस्थित रणनीति का हिस्सा है, ताकि वे खुद को उस दौर में हुए सांप्रदायिक कत्लेआम की जिम्मेदारी से दोषमुक्त साबित कर सकें। वह भी उस घटना के लिए, जिसके होने के वक्त वे खुद मुख्यमंत्री थे।

क्या रहा कांग्रेस का पूरा बयान?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री की राजनीतिक प्रतिशोध की मशीन उन दिवंगत नेताओं को भी नहीं बख्शती, जो उनके सियासी विरोधी थे।” उन्होंने आगे कहा- यह उनकी (मोदी की) अनिच्छा और अक्षमता थी कि वह इस नरसंहार को नहीं रोक पाए। इसी वजह से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मुख्यमंत्री मोदी को राजधर्म निभाने की बात कही थी।”

रमेश ने कहा, ‘‘यह एसआईटी अपने राजनीतिक आकाओं की धुन पर नाच रही है और उसे जो कहा जाएगा वही करेगी। हम जानते हैं कि पहले के एक एसआईटी प्रमुख को राजनयिक जिम्मेदारी से नवाजा गया, क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘क्लीन चिट’ दी थी।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘न्यायिक प्रक्रिया के चलने के दौरान अपनी कठपुतली एजेंसियों के जरिए अनर्गल आरोप लगाकर प्रेस के माध्यम से फैसला सुनाना मोदी-शाह की तरकीबों की वर्षों से पहचान रही है। यह मामला कुछ नहीं बल्कि इसी की एक मिसाल, बस इतना है कि एक दिवंगत व्यक्ति को बदनाम किया जा रहा है जो ऐसे सरेआम बोले जा रहे झूठ को खारिज करने के लिए उपलब्ध नहीं हो सकते।’’

एसआईटी ने कोर्ट के सामने किए बड़े खुलासे
गौरतलब है कि कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बाद पैदा हुई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं की वजह से अहमद पटेल का 25 नवंबर, 2020 को निधन हो गया था। एक दिन पहले ही गुजरात पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कोर्ट के सामने बयान दिया था। एसआईटी ने कहा था कि 2002 के गुजरात दंगे के मामले में पीएम नरेंद्र मोदी को घेरने की बड़ी साजिश में तीस्ता सीतलवाड़ भी एक मोहरा थीं। जांच दल ने कहा था कि सीतलवाड़ का इस्तेमाल तब कांग्रेस के बड़े नेता रहे अहमद पटेल ने किया था।

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