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ग्वालियर। मुरार जिला अस्पताल का मेडिसिन विभाग इन दिनों डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ओपीडी और वार्डों में भर्ती मरीजों का इलाज महज एक मेडिसिन विशेषज्ञ के भरोसे चल रहा है। डॉक्टरों की कमी के कारण विभाग की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं और मरीजों के साथ-साथ चिकित्सक पर भी काम का दबाव बढ़ गया है।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन मेडिसिन विभाग की ओपीडी में करीब 350 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जबकि वार्ड और आईसीयू में लगभग 110 मरीज भर्ती हैं। इन सभी मरीजों की जिम्मेदारी फिलहाल एक ही मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर मुकेश तोमर पर है। स्थिति यह है कि डॉक्टर को ओपीडी में मरीज देखने के साथ-साथ वार्डों और आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों का भी उपचार करना पड़ रहा है। इसके कारण उन्हें लगातार अलग-अलग वार्डों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उपचार व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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इधर मुरार जिला अस्पताल में तीन वर्ष पहले फेफड़ों में फंगल संक्रमण (पलमोनरी फंगस) की जांच के लिए अत्याधुनिक मशीन उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन आज तक इससे एक भी मरीज की जांच नहीं की गई। मशीन स्थापित होने के बावजूद उसका उपयोग शुरू नहीं हो सका है, जबकि अस्पताल में प्रतिदिन करीब 25 क्षय रोगी उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। यहां दो क्षय रोग विशेषज्ञ भी पदस्थ हैं, फिर भी जरूरतमंद मरीजों को पलमोनरी फंगस टेस्ट की सुविधा नहीं मिल रही। जांच की आवश्यकता होने पर उन्हें अन्य संस्थानों में रैफर किया जाता है।
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