स्मृति शेष: सिंधिया घराने  की अंतिम महारानी थीं माधवी राजे

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां श्रीमती माधवी राजे सिंधिया नहीं रहीं। वे लम्बे अरसे से अस्वस्थ थीं। एक लम्बे अरसे से सार्वजनिक जीवन से दूर अपने परिवार में रमीं रहने वाली श्रीमती माधवी राजे सिंधिया अपने यशस्वी खानदान की अंतिम विधिक महारानी थीं ,उन्हें क़ानूनन सिंधिया राजघराने के राज चिन्हों और प्रतीकों का इस्तेमाल करते हुए महारानी रहने का सुख केवल पांच साल ही मिल सक।  1971 में भारत सरकार ने देश के तमाम राजघरानों के साथ सिंधिया राजघराने के सभी विशेषाधिकार और प्रतीक चिन्ह छीन लिए थे।
श्रीमती माधवी राजे सिंधिया 8 मई 1966  को नेपाल से सिंधिया घराने की महारानी बनकर आयीं थीं। उनका विवाह सिंधिया घराने के अंतिम राज प्रमुख श्री माधवराव सिंधिया से हुआ था। उस समय राजमाता की पदवी श्रीमती विजयाराजे सिंधिया के पास थी। माधवी राजे नेपाल के कास्की और लामजुंग के महाराजा शमशेर जंग बहादुर राणा की पुत्री थीं।  विवाह से पहले उनका नाम किरण राज लक्ष्मी देवी था।  सिंधिया परिवार का हिस्सा बनते ही उनका नाम किरण से माधवी राजे हो गया। श्रीमती माधवी राजे की पहली संतान चित्रांगदा राजे थीं। उनका जन्म 1967 में हुआ,उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया 1971 में जन्मे।
परम्परा ने श्रीमती माधवी राजे सिंधिया को राजमाता उसी दिन बना दिया था जिस दिन उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया का विवाह हुआ था ,लेकिन वैधानिक रूप से वे राजमाता नहीं बन पायीं थी।  राजमाता के रूप में जो सम्मान उनकी सास श्रीमति विजया राजे सिंधिया को हासिल हुआ था ,वो भी उन्हें शायद हासिल नहीं हुआ। इसकी वजह ये है कि वे अपनी सास की तरह न तो जनता से बहुत हिलिमिली थीं और न उनकी सार्वजनिक जीवन में बहुत ज्यादा उपस्थिति थी ,हालाँकि उनके विवाह के पांच साल बाद ही माधवीराजे के पति माधवराव सिंधिया राजनीति में उत्तर आए थे।  माधवराव सिंधिया ने 1971,1977 और 1980 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता था।
राजघराने की परम्पराओं से बंधी श्रीमती माधवी राजे ने पहली बार राजमहल की सीढ़ियां लांघने का साहस 1985 में तब दिखाया जब उनके पति माधवराव सिंधिया ग्वालियर से भाजपा के अटल बिहारी बाजपेयी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे। मुझे खूब याद है कि उस चुनाव में श्रीमती माधवी राजे सिंधिया ने अपने पति के लिए कंधे से कन्धा मिलाकर चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया था। वे अपने पुत्र,पुत्रवधु और बेटी-दामाद के साथ तक छोटी-छोटी नुक्क्ड़ सभाओं में भाषण देने जातीं थीं। एक सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन घायल के अलावा कुछ और लोग पूरे चुनाव में माधवी राजे सिंधिया की सभाओं और जनसम्पर्क कार्यक्रमों की रूपर रेखा बनाते थे।
श्रीमती माधवी राजे का ग्वालियर से मोह तभी तक रहा जब तक की उनके पति जीवित रहे ।  2002  में माधवराव सिंधिया के आकस्मिक निधन के बाद श्रीमती माधवी राजे का राजनीति से और ग्वालियर से मोग भंग हो गया ।  उन्होंने अपने आपको अपने परिवार बहू,बेटे  और नाती-पोतों तक सीमित कर लिया। उनका ग्वालियर आना भी पहले के मुकाबले बहुत कम हो गया था। लेकिन वे अपने पति के समर्थकों को नाम से पहचानती और पुकारती थीं। वे बहुत स्वाभिमानी  और करुणामयी थी। उन्होंने अपने पति के निधन के बाद अपने बेटे को राजनीति में स्थापित होते देखकर ही सुखानुभूति कर ली लेकिन वे कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए चुनाव प्रचार करतीं नहीं दिखाई दीं।  कुछ महल की मर्यादा और कुछ परिस्थितियां उन्हें एकाकी बनाती चली गयी। अन्तिम समय में उनके बहू,बेटे और नाती महाआर्यमन ने उनका भरपूर ख्याल रखा। उनकी कमी ग्वालियर को खलेगी,क्योंकि उनके जाने के बाद ग्वालियर की एक पीढ़ी है जिसका महल में  कोई अपना कहने वाला नहीं रहा। श्रीमती माधवी राजे सिंधिया और राजमाता विजयाराजे  सिंधिया में कोई समानता नहीं थी लेकिन वे महल की गरिमा को आजीवन बनाये रखने में कामयाब रहीं यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि  थी।वे राजमाता विजया राजे सिंधिया की तरह किसी विवाद की जद में नहीं आईं।विनम्र श्रृद्धांजलि।
   @ राकेश अचल
hacklink satın al alobet alobet giriş jasminbet jasminbet giriş imajbet imajbet giriş perabet perabet giriş holiganbet holiganbet giriş romabet romabet giriş jojobet casibom perabet perabet giriş perabet güncel giriş egebet egebet giriş kavbet kavbet giriş perabet perabet giriş merchantgiftcard.giftcardmall.com jojobet jojobet giriş vaycasino vaycasino giriş lunabet lunabet giriş betsmove betsmove giriş holiganbet holiganbet giriş holiganbet güncel giriş perabet perabet giriş superbetin süperbetin jojobet jojobet giriş vdcasino vdcasino vdcasino vdcasino lunabet https://lunabetgiris.biz lunabet giriş jasminbet https://jasminbetgirisadresi.com jasminbet giriş https://enbetguncelgiris.info enbet enbet giriş https://bahisvebahisgunceladres.org bahisvebahis bahisvebahis giriş perabet perabet giriş https://perabet-login-tr.com casibom marsbahis marsbahis giriş betsmove betsmove giriş betsmove güncel giriş betsmove betsmove giriş betsmove güncel giriş lunabet lunabet giriş lunabet güncel giriş betsmove betsmove giriş lunabet lunabet giriş lunabet güncel giriş lunabet lunabet giriş lunabet güncel giriş holiganbet holiganbet giriş holiganbet güncel giriş holiganbet güncel giriş marsbahis marsbahis giriş marsbahis güncel giriş meritking giriş meritking güncel giriş kingroyal kingroyal giriş marsbahis marsbahis giriş marsbahis güncel giriş kralbet kralbet giriş www.giftcardmall.com/mygift dumanbet dumanbet giriş